बीते दिनों कानपुर में एक ऐसी बरसात हुई जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं. दरअसल, ये प्राकृतिक बारिश नहीं थी, बल्कि आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों नें कृत्रिम रूप से इस बारिश को तैयार किया था. ये तरीका इतना शानदार है कि अब देश के किसी भी कोने में जरूरत पड़ने पर कृत्रिम रूप से बारिश कराई जा सकती है.
कैसे हुई कृत्रिम बारिश
कृत्रिम बारिश कराने के लिए जो प्रोसेस इस्तेमाल किया गया उसे क्लाउड सीडिंग कहा जाता है. इस प्रोसीजर के तहत आप कृत्रिम तरीके से कहीं पर भी बारिश करा सकते हैं. इस प्रयोग को सफल बनाने में कानपुर आईआईटी को 6 साल लग गए. इस प्रोजेक्ट को हेड कर रहे थे प्रो. मणींद्र अग्रवाल, जो इसकी सफलता के बाद खुशी से फूले नहीं समा रहे थे.